
Professor Ki Diary (Hindi Edition)
Musa Keys
تفصیل
यह किताब डायरी, नोट्स और टिप्पणियों की शैली में अपने समय की तफ्तीश करती है। इसमें समाज और राजनीति की बड़ी परिघटनाएं हैं तो इसके बीच बनते हुए एक प्रबुद्ध नौजवान की कहानी भी है। यह आज़मगढ़ के पिछड़े किसान परिवार में पैदा होता है। इलाहाबाद और दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ायी करता है। दशक भर से ज़्यादा दिल्ली के एक कॉलेज में अध्यापन करता है। उसके कंधों पर गरीब परिवार की अपेक्षाओं और अपने सपनों का वज़न है। वह अकेला है। वह असमंजस, असुरक्षा और अनिश्चितता से घिरा हुआ है। वह डरा हुआ है। मगर वह किताबों को नौकरी पाने का जरिया नहीं बनाता, उनसे अपने समाज को समझने का नज़रिया हासिल करता है। सत्ताएँ उसे डराती हैं तो वह डरने की बजाय दुस्साहसी होता जाता है। धीरे-धीरे उसकी समझ, दायित्वबोध और लोकप्रियता का दायरा बढ़ता जाता है। वह क्लास के छात्रों से सुदूर ग्रामीण लोगों तक का प्रोफ़ेसर बन जाता है। यह फिक्शनल है, क्योंकि इसमें संज्ञाएँ बदल दी गयी हैं. यह नॉनफ़िक्शन है, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति, सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ रत्ती-रत्ती सही हैं। इसमें इसमें कथा, संवाद और सटायर है तो वक्तृता और विश्लेषण की चमक भी। इसमें वह सब है, जो एक पठनीय किताब में होना चाहिए।Please note: This audiobook is in Hindi.Read more
اپ لوڈر
اقساط (55)
अध्याय १: अगस्त, २०१० - यूँ शुरू हुई कहानी
अध्याय २: ३१ अगस्त, २०१० - दरवाज़े पर दस्तक
अध्याय ३: १ सितंबर, २०१० - शजर पर घोंसला
अध्याय ४: २ सितंबर, २०१० - आईने में प्रोफ़ेसर
अध्याय ५: २७ सितंबर, २०१० - स्टाफ़रूम के क़िस्से
अध्याय ६: ७ नवंबर, २०१० - क्लासरूम और क्रांति
अध्याय ७: १५ नवंबर, २०१० शोध-निर्देशक ऐसे भी
अध्याय ८: २ जनवरी, २०११ - दो लोग और तीन एडहॉक
अध्याय ९: २८ मार्च, २०११ - खौफ़ और ख़्वाब
अध्याय १०: १८ अप्रैल, २०११ - सुपरवाइज़र की कंघी