वेबिनार: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डाटा का संग्रह है इंडिया डाटा पोर्टल
वेबिनार: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डाटा का संग्रह है इंडिया डाटा पोर्टल

वेबिनार: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डाटा का संग्रह है इंडिया डाटा पोर्टल

Arun Jain

79 min
News
Play

Description

<p>ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हो रही रिपोर्टिंग में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है डाटा. यह डाटा, अलग-अलग विषयों पर उपलब्ध है जो रिपोर्ट में सभी तथ्यों को पूरा करता है. इसी विषय पर न्यूज़लॉन्ड्री ने यह वेबिनार आयोजित की, जिसमें विस्तृत रूप से इस मुद्दे पर बात की गई.&nbsp;</p><br><p>इस वेबिनार में मेहमान के तौर पर आईआईटी दिल्ली की एसोसिएट प्रोफेसर और लेखक रीतिका खेड़ा, गांव कनेक्शन के एसोसिएट एडिटर अरविन्द शुक्ला, स्वतंत्र पत्रकार पुष्यमित्र, पीपल आर्काइव ऑफ़ रूरल इंडियन से जुड़ीं पत्रकार मेधा काले और भारती इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी में कम्युनिकेशन प्रमुख दीप्ती सोनी ने हिस्सा लिया. इस वेबिनार का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने कियादीप्ति शुरुआत में इंडिया डाटा पोर्टल के बारे में बताते हुए कहती हैं, “यह पोर्टल हर किसी के लिए खुला है, जिसे खासतौर से पत्रकारों की मदद के लिए बनाया गया है. इसके साथ ही शोधकर्ता और छात्र आदि के लिए भी यह पोर्टल बनाया गया है. पोर्टल पर मौजूद जानकारी&nbsp; भारत के 28 राज्यों और आठ केंद्र-शासित प्रदेशों के बारे में है, जो कि छह भाषाओं में उपलब्ध है. वहीं एग्रीकल्चर सेंसेस, सॉइल, रेन फॉल जैसे 40 अलग-अलग डाटा सेट इस वक्त पोर्टल पर मौजूद हैं. इन जानकारी को 45 से भी जायदा ग्राफ़िक्स या चित्र के रूप में उपयोग किया जा सकता है.</p><br><p><br></p><p>सत्र में आगे अतुल आकंड़ों की बात करते हुए रीतिका खेड़ा से सवाल करते हुए कहते हैं "क्या सच में इस तरह के आकड़ों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हमारी मीडिया को सूचना सम्पन्न और उसकी रिपोर्टिंग को प्रभावशाली बनाने में मदद कर सकती है"?इस पर रीतिका कहती हैं "ये सवाल बहुत अहम है जो मुद्दे की जड़ तक जाता है. अगर देखा जाए तो पत्रकारों की पकड़ मुद्दे पर नहीं है. ऐसे में डाटा को जल्दबाजी में इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के तौर पर प्रजेंटेशन में बताया गया है कि कैसे मनरेगा में कितनों की मांग थी और कितने लोगों को काम मिला. यह सब सरकारी खेल है जो एमआईएस के डाटा में होता है और यह कब अपलोड किया जाएगा उसका किसी को पता नहीं.&nbsp;</p><br><p>इस विषय पर अतुल कहते हैं हम लम्बे समय से देख रहे हैं कि ग्रामीण पत्रकारिता, कभी पत्रकारिता में एक बीट हुआ करता थी और कृषि पत्रकारिता मुख्यधारा की पत्रकारिता से गायब हो गई है. मौजूदा समय में दूसरा पी साईनाथ जैसा नाम ख

Uploader

bella.moon

bella.moon

वेबिनार: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डाटा का संग्रह है इंडिया डाटा पोर्टल - Listen Free | WowFM