
स्वयं श्री कृष्ण द्वारा
Abdel-oubaid
Description
सच्चे अर्थों में लोकनायक हैं भगवान श्री कृष्ण भगवान कृष्ण एक विलक्षण महानायक हैं, उन्होंने अपने बाल्यकाल से ही लीलाएं दिखाना आरंभ कर दी थी। उनकी हर एक लीला में विरोधाभास नजर आता है, जो साधारणतः समझ से परे है। जहां ज्ञानी से परम ज्ञानी भी उनको वेद-पुराणों और ऋचाओं में नहीं खोज पाते हैं तो वहीं साधारण मनुष्य केवल प्रेम भावना से उन्हें प्राप्त कर लेता है। यही तो उनके व्यक्तित्व की विलक्षणता है कि उन्होंने संपूर्ण मानवजाति को जो शिक्षण केवल अपनी मोहक लीलाओं और उपदेशों से जो अमूल्य ब्रह्म ज्ञान दिया, उसे किसी भी महान लेखनी द्वारा भी नहीं बांधा जा सकता है। वे ईश्वर होते हुए भी सभी के अत्यधिक करीब हैं, वे अत्यंत मानवीय हैं। उनका पूरा जीवन अद्भुत लीलाओं से भरा हुआ था लेकिन सही मायने में उनका व्यक्तित्व सदैव एक सखा की तरह रहा। वे यमुना किनारे गइया चराते, ग्वालों के संग शरारते करते और गोपियों संग रास भी रचाते। दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण होते हुए वे सच्चे अर्थों में लोकनायक हैं। अर्जुन को भगवान कृष्ण ने जीवन का रहस्य और धर्म व कर्म को इतनी सरलता से समझाया जो कोई और महापुरुष नहीं कर सकता धर्म का मार्ग दिखाते हैं श्री कृष्ण भगवान श्री कृष्ण के चरित्र का वर्णन उनके समकालीन ऋषि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में मिलता है जिसका एक भाग श्रीमद्भगवद गीता के रूप में उद्धृत हैं। श्रीमद्भगवतगीता में भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच का संवाद है जो ने केवल महाभारत के युग में बल्कि आज युगों के बाद कलयुग के समय में भी मनुष्यों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। यही कारण है कि भगवान के श्री मुख से निकले इन शब्दों श्रीमद्भगवदगीता में पिरोया गया है, न केवल सनातन धर्म में बल्कि संपूर्ण विश्व में इसे महान ग्रंथ के रूप में जाना जाता है। अर्जुन को भगवान कृष्ण ने जीवन का रहस्य और धर्म व कर्म को इतनी सरलता से समझाया जो कोई और महापुरुष नहीं कर सकता। श्री कृष्ण एक आलौकिक और अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के लिए उपवास कर या फिर केवल फल, फूल और नैवेद्य अर्पित कर उन्हें नहीं पूजना चाहिए अपितु उनके दिखाए मार्ग को अपनाना चाहिए। जहां अर्जुन के लिए मार्गदर्शक हैं तो वहीं द्रोपदी के लिए एक सखा और भ्राता भी हैं। प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं श्री कृष्ण प्रेम का सही अर्थ और सच्चे प्रेम की अनुरक्ति क्या होती है ये